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deepawali Festivals of India: diwali
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क्या है पर्यूषण पर्व?
जैन संप्रदाय का धार्मिक त्यौहार जो कि प्रत्येक वर्ष भाद्रमास में मनाया जाता है। इस महान आध्यात्मिक पर्व का मुख्य ध्येय आत्म—साधना और आत्मजागृति है। श्वेताम्बर इसे कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी से प्रारंभ करके शुक्ल पक्ष की पंचमी तक मनाते हैं जबकि दिगम्बर भादों महीने की शुक्ल पंचमी से चतुर्दशी तक दस दिन तक यह पर्व मनाते हैं।
श्वेतांबर अष्टाद्रिक पर्व या अठाई पर्व और दिगम्बर दशलक्षण पर्व के रूप में मनाते हैं।
भाद्रपद जैन मत का सबसे पवित्र महीना है। उसमें दशालक्षणी और पर्यूषण सबसे पवित्र काल है और चतुर्दशी उसका सबसे पवित्र दिन है। पर्यूषण महापर्व के अंतिम दिन संध्या के समय सांवत्सरिक यानि वार्षिक प्रतिक्रमण होता है। इस प्रतिक्रमण में जैन मतावलंबी चौरासी लाख योनि जीवों से मन, वचन और काया से क्षमा—याचना मांगते हैं। तथा दूसरे दिन प्रात:काल सभी परिजनों और सगे संबंघियों से गले मिलते हैं। इस तरह पर्यूषण महापर्व आत्मशुद्धि के साथ मन की गंदगी को दूर करने का अवसर प्रदान करने वाला पर्व है।

नवकार मंत्र के सतत् जप, कल्पसूत्र वाचन व संतों के आध्यात्मिक उपदेश के साथ साथ भगवान महावीर द्वारा प्रदत्त पांच ज्ञानोपदेश (प्राणी मात्र की हिंसा न
करना, किसी वस्तु को बिना दिए स्वीकार न करना, मिथ्या भाषणर न करना, ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना, अपरिग्रह के प्रति समर्पित रहना) का चिंतन
मनन—आचरण पर्यूषण पर्व के मुख्य उद्देश्यों में शरीक हैं। इससे आत्मा निर्मल होती है और किसी तरह के सांसारिक विकार पास नहीं फटकते।
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