| पांच पर्वो का महापर्व:- दीपावली |
रोशनी का त्यौहार दीवाली देश के हर हिस्से में मनाया जाता है। नवरात्रा और दशहरे के ठीक बीस दिन बाद आने वाला यह त्यौहार इसलिए भी विशिष्ट है क्योंकि इसकी धूम पूरे पांच दिनों तक रहती है और इसीलिए इस महापर्व भी कहते है। पौराणिकमहत्व के साथ साथ रोशनी के इस पर्व की सामाजिक महत्ता भी है। |
| दीपावली |
दीपावली रौशनी का त्यौहार है। दीपावली एक संस्कृत शब्द है जो दो शब्दों दीप और आवली से मिलकर बना है। यहां पर दीप का तात्पर्य दीयों अथवा रौशनी से है जबकि आवली का अर्थ है दीपक की कतारें। इसलिए दीपावली की रात घर को दीपक की आलियों से सजाते हैं। दीपावली दीप पर्व है, आशा पर्व है,समृद्धि पर्व है और कुल मिलाकर जीवन पर्व है। |
| दीपावली
और दीप |
| दीपावली दीप का जन्म दिन भी है। दीप से हमारा रिश्ता आज भी अटूट है। दीप सनातन अनिवार्यता है। हमारा शरीर मिटटी का बना है। दीप भी मिटटी का बना है।आलोक दीप की प्राणवन्नता है। तेल जीवन-क्षमता है,उम्र है। बाती के जलने से पीडा आत्मिक और बौद्धिक उजास खोजने की पीडा है।दीपावली अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का पर्व है। दीप अंधेरे से उजाले की ओर जाने का प्रतीक है। महात्मा बुद्ध ने अपने शिष्य को ज्ञान-पथ पर आत्मनिर्भर होने के लिए उपदेश दिया था- आत्मदीपो भव यानी अपना दीप स्वयं बनो। एन लाइट योर सेल्फ। प्राणशक्ति में छुपे आलोक का अनुसंधान करो। |
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