रमजान को
सब्र का महीना
कहा जाता है।
इस्लाम में
रमजान को सबसे
बेहतरीन महीना
कहा गया है।
इस्लाम मजहब
के आखिरी पैगम्बर
हज़रत मोहम्मद
सल्लम पर इसी
माह पाक कुरआन
शरीफ नाजिल
हुआ था। इस माह
को रहमतों, बरकतों
और मगफिरतों
का महीना भी
कहा जाता है
। रमजान का महीना
रब को राजी करने
का महीना है।
हदीस में आता
है कि सब्र का
बदला खुदा है।
जो सब्र करता
है उसे खुदा
मिलता है यानी
खुदा की खुशनुदी,
कृपादृष्टि
हासिल होती
है। रमजान के
बारे मे आता
है कि यह सबसे
ज्यादा बरकत
और रहमत का माह
होता है। इस
माह में बंदों
पर रहमतों की
बारिश होती
है। शैतान कैद
कर लिए जाते
हैं । इस माह
में बंदों पर
से रिज्क यानी
आर्थिक तंगी
दूर हो जाती
है। इस्लाम
के पाँच स्तून
हैं जिसमें
तौहीद, नमाज,
रोजा, हज और जकात
आते हैं। रोजा
को भी नमाज के
बाद एक स्तंभ
माना गया है।
रोजा दरअसल
रब को राजी कर
अपनी दुनिया
और आखिरत बनाने
का नाम है।